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नमाज के नियमों, उसके स्तंभों, ज़िक्रों और गुणों की एक पूर्ण और व्यापक मार्गदर्शिका, पवित्र नबवी सुन्नत के अनुसार सरल और आसान व्याख्या के साथ

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नमाज के स्तंभ
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नमाज के स्तंभ

14 स्तंभ जिनके बिना नमाज सही नहीं (बहुसंख्यक विद्वानों के अनुसार)

1 नियत
⚠️ النية عمل قلبي لا لفظي - محلها القلب
नियत दिल का काम है, ज़बानी नहीं - इसका स्थान दिल है
नमाज की शुद्धता के लिए नियत मूलभूत शर्त है, इसका स्थान दिल है और इसे ज़बान पर लाना आवश्यक नहीं
स्तंभ - मूलभूत शर्त सहमत
नियत दिल में है, इसे ज़बान पर लाना आवश्यक नहीं
2 तकबीर-ए-तहरीमा
اللهُ أَكْبَرُ
अल्लाहु अकबर
तकबीर-ए-तहरीमा पहली चीज़ है जिससे नमाज शुरू होती है और नमाज की शुद्धता के लिए शर्त है
स्तंभ - मूलभूत शर्त सहमत
तकबीर के साथ हाथ उठाना सुन्नत है
3 क़ियाम
الْقِيَامُ فِي الْفَرْضِ لِلْقَادِرِ
सक्षम के लिए फर्ज़ नमाज में क़ियाम
सक्षम व्यक्तियों के लिए फर्ज़ नमाज में क़ियाम अनिवार्य है, यह एक स्तंभ है जो बिना उज़्र के साकित नहीं होता
सक्षम के लिए स्तंभ सहमत
दाएँ हाथ को बाएँ हाथ पर सीने पर रखना सुन्नत है
4 सूरह फातिहा पढ़ना
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ * الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
हर रकअत में सूरह फातिहा पढ़ना स्तंभ है और इसके बिना नमाज सही नहीं
हर रकअत में स्तंभ सहमत
फातिहा को जहरी नमाजों में ऊँची आवाज़ से और सिरी नमाजों में आहिस्ता पढ़ना सुन्नत है
5 रुकू
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
सुब्हाना रब्बियल अज़ीम
रुकू नमाज का स्तंभ है, इसका कम से कम यह है कि हाथ घुटनों तक पहुँच जाएं
स्तंभ सहमत
तीन या अधिक बार तस्बीह पढ़ना सुन्नत है
6 रुकू से उठना
سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ - رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
समिअल्लाहु लिमन हमिदाह - रब्बना व लकल हम्द
रुकू से उठना और सीधा खड़े होना नमाज का स्तंभ है
स्तंभ सहमत
उठने के बाद "रब्बना व लकल हम्द" कहना सुन्नत है
7 सजदा
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
सुब्हाना रब्बियल आला
सात अंगों पर सजदा: माथा, नाक, हाथ, घुटने और पैर की उँगलियाँ
स्तंभ सहमत
तीन या अधिक बार तस्बीह पढ़ना सुन्नत है
8 सजदा से उठना
اللهُ أَكْبَرُ
अल्लाहु अकबर
सजदा से उठना और दो सजदों के बीच बैठना नमाज का स्तंभ है
स्तंभ सहमत
दो सजदों के बीच "रब्बिग़फिर ली" कहना सुन्नत है
9 दो सजदों के बीच बैठना
رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي
रब्बिग़फिर ली, रब्बिग़फिर ली
दो सजदों के बीच बैठना, "रब्बिग़फिर ली" कहना मुस्तहब है
स्तंभ सहमत
इफ्तिराश की हालत में बैठना सुन्नत है
10 इत्मीनान
الطُّمَأْنِينَةُ
हर स्तंभ में इत्मीनान
इत्मीनान नमाज के हर स्तंभ में शांति है
स्तंभ सहमत
हर स्तंभ में इत्मीनान वाजिब है
11 तशह्हुद
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तैय्यिबातु
अंतिम तशह्हुद बहुसंख्यक विद्वानों के अनुसार स्तंभ है
बहुसंख्यक के अनुसार स्तंभ सहमत
तशह्हुद में शहादत की उँगली से इशारा करना सुन्नत है
12 इब्राहीमी दरूद
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद
अंतिम तशह्हुद में नबी पर दरूद कुछ विद्वानों के अनुसार स्तंभ है
कुछ विद्वानों के अनुसार स्तंभ सहमत
नबी पर दरूद सबसे अच्छी दुआओं में से है
13 तरतीब
التَّرْتِيبُ
स्तंभों को उनके क्रम के अनुसार रखना
स्तंभों को नमाज में उनके क्रम के अनुसार रखना, एक स्तंभ को दूसरे पर मुकद्दम करना जायज़ नहीं
स्तंभ सहमत
तरतीब वाजिब है, एक स्तंभ को दूसरे पर मुकद्दम करना जायज़ नहीं
14 सलाम
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللهِ
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह
दाएँ और बाएँ सलाम नमाज का समापन है और कुछ विद्वानों के अनुसार स्तंभ है
कुछ विद्वानों के अनुसार स्तंभ सहमत
दाएँ और बाएँ सलाम करना सुन्नत है

नमाज के ज़िक्र

नमाज से पहले, दौरान और बाद में साबित ज़िक्र

नमाज से पहले के ज़िक्र

2 ज़िक्र

ज़िक्र

اللهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا، وَسُبْحَانَ اللهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
अल्लाह बहुत बड़ा है, और अल्लाह की बहुत प्रशंसा है, और अल्लाह सुबह-शाम पाक है
दुआ-ए-इस्तिफ्ताह
1 बारमुस्लिम रिवायत

ज़िक्र

سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَى جَدُّكَ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ
हे अल्लाह! तेरी पाकी और तेरी प्रशंसा है, तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है, और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं
दुआ-ए-इस्तिफ्ताह
1 बारअबू दाऊद और तिर्मिज़ी रिवायत

नमाज के दौरान ज़िक्र

3 ज़िक्र

ज़िक्र

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
मेरा रब महान है, मैं उसकी तस्बीह करता हूँ
रुकू का ज़िक्र
3 बारअबू दाऊद और तिर्मिज़ी रिवायत

ज़िक्र

سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ
अल्लाह ने सुना जिसने उसकी प्रशंसा की
रुकू से उठने का ज़िक्र
1 बारसहमत

ज़िक्र

سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
मेरा रब सर्वोच्च है, मैं उसकी तस्बीह करता हूँ
सजदे का ज़िक्र
3 बारअबू दाऊद और तिर्मिज़ी रिवायत

नमाज के बाद के ज़िक्र

2 ज़िक्र

ज़िक्र

أَسْتَغْفِرُ اللهَ (ثَلاثًا)، اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ (तीन बार), हे अल्लाह! तू सलाम है और तुझी से सलाम है, हे जलाल और इकराम वाले तू बरकत वाला है
सलाम के बाद इस्तिग़फार
3+1 बारमुस्लिम रिवायत

ज़िक्र

سُبْحَانَ اللهِ (٣٣)، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ (٣٣)، وَاللهُ أَكْبَرُ (٣٣)
अल्लाह पाक है (33), अल्लाह की प्रशंसा है (33), अल्लाह बहुत बड़ा है (33)
नमाज के बाद तस्बीह
33+33+33 बारसहमत

नमाज के गुण

अल्लाह ने नमाज पढ़ने वालों के लिए बड़े गुण तैयार किए हैं

अल्लाह को सबसे प्रिय अमल

वक्त पर नमाज पढ़ना अल्लाह को सबसे प्रिय अमल है
عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ رضي الله عنه قَالَ: سَأَلْتُ النَّبِيَّ ﷺ: أَيُّ الْعَمَلِ أَحَبُّ إِلَى اللَّهِ؟ قَالَ: "الصَّلَاةُ عَلَى وَقْتِهَا"
सहमत

मोमिन का नूर

नमाज मोमिन के लिए दुनिया और आख़िरत में नूर है
عَنْ أَبِي مَالِكٍ الْأَشْعَرِيِّ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ: "الصَّلَاةُ نُورٌ"
मुस्लिम रिवायत

गुनाहों का कफ्फारा

एक नमाज से दूसरी नमाज उनके बीच के गुनाहों का कफ्फारा है
عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ: "مَنْ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ، ثُمَّ صَلَّى الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ، غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهَا وَبَيْنَ الصَّلَاةِ الَّتِي تَلِيهَا"
मुस्लिम रिवायत

दीन का स्तंभ

नमाज इस्लाम का स्तंभ है, जिसने इसे क़ायम किया उसने दीन को क़ायम किया
عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ: "رَأْسُ الْأَمْرِ الْإِسْلَامُ، وَعَمُودُهُ الصَّلَاةُ"
तिर्मिज़ी रिवायत

नमाज को तोड़ने वाली चीज़ें

जो चीज़ें नमाज को तोड़ती हैं और दोबारा पढ़नी पड़ती है, फिक़्ही इख्तिलाफ़ के साथ

हदस (नापाकी)
हवा, पेशाब या पाखाना का निकलना
सहमत
वुज़ू तोड़ता है और इस वजह से नमाज भी तोड़ता है
जानबूझकर बात करना
नमाज की मसलहत के बिना जानबूझकर बात करना
सहमत
जानबूझकर बात करने से नमाज टूट जाती है, भूलने वाला माफ है
हँसना
नमाज में ऊँची आवाज़ से हँसना
सर्वसम्मति
ऊँची आवाज़ से हँसने से नमाज टूट जाती है, लेकिन मुस्कुराना नमाज नहीं तोड़ता
खाना-पीना
नमाज में जानबूझकर खाना या पीना
सर्वसम्मति
नमाज को तोड़ता है क्योंकि यह नमाज के अफ़आल से बाहर है
सतर खुलना
बिना उज़्र के सतर का खुलना
सर्वसम्मति
नमाज की शुद्धता के लिए सतर छिपाना शर्त है

नमाज की सुन्नतें

भूली हुई सुन्नतें जिन्हें मुसलमान जानते तो उनका सवाब बढ़ जाता

तकबीर-ए-तहरीमा के साथ हाथ उठाना
तकबीर-ए-तहरीमा पर हाथ उठाना सुन्नत है
दाएँ हाथ को बाएँ हाथ पर सीने पर रखना
दाएँ हाथ को बाएँ हाथ पर सीने पर रखना सुन्नत है
नमाजी का सजदे की जगह देखना
नमाजी का सजदे की जगह देखना सुन्नत है
दुआ-ए-इस्तिफ्ताह
तकबीर-ए-तहरीमा के बाद दुआ-ए-इस्तिफ्ताह पढ़ना सुन्नत है
पढ़ने से पहले तअव्वुज़ पढ़ना
सूरह फातिहा पढ़ने से पहले तअव्वुज़ पढ़ना सुन्नत है
फातिहा के बाद आमीन कहना
सूरह फातिहा के बाद आमीन कहना सुन्नत है
पहली दो रकअतों में फातिहा के बाद सूरह पढ़ना
पहली दो रकअतों में फातिहा के बाद सूरह पढ़ना सुन्नत है
रुकू में हाथ उठाना
रुकू में हाथ उठाना सुन्नत है

नमाज दीन का स्तंभ है

अपनी नमाज की हिफाज़त करो ताकि कामयाब लोगों में से हो, क्योंकि क़यामत के दिन बंदे से पहली चीज़ जिसके बारे में पूछा जाएगा वह नमाज है

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